मेहनत, लगन और तकनीक से श्री संतोष बघेल बने सफल पशुपालक
#सफलता_की_कहानी
मेहनत, लगन और तकनीक से श्री संतोष बघेल बने सफल पशुपालक
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स्वयं आत्मनिर्भर बनकर अन्य व्यक्तियों का भी कर रहे मार्गदर्शन
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#सिवनी / ग्राम थिगरीपार, विकासखंड सिवनी के श्री संतोष कुमार बघेल कभी एक सामान्य ग्रामीण किसान थे। उनके पिता श्री जगदीश सिंह बघेल पारंपरिक तरीके से देशी गायों और भैंसों का पालन करते थे। परिवार का जीवन पशुपालन पर ही निर्भर था, परंतु सीमित दूध उत्पादन और कम आमदनी के कारण आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर बनी रहती थी। फिर भी पशुपालन उनके परिवार के संस्कारों में रचा-बसा था।
वर्ष 2018 में श्री संतोष बघेल के जीवन में परिवर्तन का अवसर आया, जब उन्होंने अपने ही क्षेत्र के सफल पशुपालक से प्रेरणा लेकर तय किया कि अब वे पशुपालन को परंपरा नहीं, बल्कि एक आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाएँगे। उन्होंने पशुपालन विभाग से संपर्क कर आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विभागीय आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का लाभ लेकर 06 लाख रूपये का बैंक ऋण और अनुदान प्राप्त से 'आराध्या डेयरी फार्म' नाम से अपनी छोटी डेयरी प्रारंभ की। प्रारंभ में उन्होंने 08 एचएफ गाय से अपने कार्य की शुरूआत की। जैसे-जैसे डेयरी आगे बढ़ी, वैसे-वैसे उनके आत्मविश्वास और आय दोनों में वृद्धि हुई।उन्होंने दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए हरे चारे की आवश्यकता को देखते हुए अपने खेत में नेपियर तथा बरसिम घास का उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया जिससे वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता बनी रही।
संतोष बघेल ने वर्ष 2020 में “पशुपालन आधारित किसान क्रेडिट कार्ड योजना” का लाभ भी उठाया। पंजाब नेशनल बैंक से 01 लाख 60 हजार रूपये की सहायता राशि मिलने पर उन्होंने अपने पशुओं के लिए संतुलित आहार, दवाइयों और उपकरणों की व्यवस्था की। धीरे-धीरे उनके पास 21 उन्नत एचएफ नस्ल की गायें हो गईं, जिनसे अब प्रतिदिन लगभग 320 लीटर दूध प्राप्त होता है।
श्री संतोष बघेल अपने क्षेत्र के प्रमुख दुग्ध उत्पादकों में से एक हैं। वे प्रति वर्ष लगभग 40 लाख रूपये का दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद विक्रय करते हैं और सभी खर्चों के बाद लगभग 15 लाख रूपये की शुद्ध वार्षिक आय अर्जित करते हैं। दूध उत्पादन के साथ-साथ वे कृषि कार्य हेतु गोबर खाद का उपयोग करते हैं और अपने घर में बायोगैस संयंत्र से स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त करते हैं। श्री संतोष बघेल न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सफल हुए हैं, बल्कि उन्होंने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है। अब कई युवा उनके मार्गदर्शन में पशुपालन को अपनाने लगे हैं। आज संतोष बघेल अपने क्षेत्र के युवाओं एवं पशुपालकों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं।
